नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बड़ा विजन सामने आया। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारी पंकज अग्रवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) देश में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण में अहम भूमिका निभा सकता है। उनके मुताबिक सड़क और परिवहन क्षेत्र में एआई के एकीकरण की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि ड्राइविंग को स्कूल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि कम उम्र से ही सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित हो सके। इस दिशा में आईआईटी मद्रास कार्य कर रहा है।
एआई और सड़क सुरक्षा: डेटा आधारित समाधान पर जोर
सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए डेटा-आधारित समाधान पर आयोजित पैनल चर्चा में पंकज अग्रवाल ने कहा कि एआई तकनीक दुर्घटनाओं को रोकने और मृत्यु दर घटाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में सबसे बड़ी समस्या तेज गति से वाहन चलाना है।
उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से सटीक डेटा संग्रह संभव है और बिना मानवीय हस्तक्षेप के ठोस साक्ष्य जुटाए जा सकते हैं। यदि वाहन-से-वाहन संचार तकनीक विकसित की जाती है, तो टक्कर से पहले ही चालक को सचेत कर दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। एआई दुर्घटनाओं और मृत्यु दर से जुड़े डेटा को व्यवस्थित और सटीक बनाए रखने में भी मददगार हो सकता है।
बिहार में मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा
अग्रवाल ने उदाहरण देते हुए बताया कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बिहार में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के विश्लेषण के जरिए राज्यों में लक्षित रणनीति बनाना संभव होगा।
प्रदूषण नियंत्रण में भी एआई की भूमिका
प्रदूषण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में यह बड़ी समस्या बन चुकी है। सरकार एआई आधारित उपकरण विकसित कर रही है, ताकि प्रदूषण से जुड़े डेटा की सटीक निगरानी की जा सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कई बार आंकड़ों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है, ऐसे में एआई पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
उन्होंने दोहराया कि एआई केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
